अपनी बुलाहट को जानिए |

अपनी बुलाहट को जानिए |

हर इंसान को परमेश्वर ने अपने राज्य में विशेष कार्य के लिए बुलाया है | सबसे पहले हमें जानना जरुरी है कि हमारा बुलाहट कितना बड़ा है | यदि मन की आँखे ज्योतिर्मय हों तभी हम अपनी बुलाहट को समझ सकते है | और हमारी मन की आँखों को परमेश्वर ही ज्योतिर्मय कर सकते है | इसके लिए हमें प्रार्थना करने की आवश्यकता है |

पौलुस, इफिसियों 1:8 में प्रार्थना करता है कि तुम्हारे मन की आँखे ज्योतिर्मय हों…|  हमारी आँखे इस दुनियां के चमक-धमक में धुंधली हो  जाती है |  हम अपनी बुलाहट को पहचान नहीं पाते हैं| हम यह नहीं देख पाते की परमेश्वर ने हमें पवित्र लोगों के मध्य बुलाया है और उसकी मीरास का धन कैसा बड़ा है |  परमेश्वर ने हमें अद्भुत ज्योति में बुलाया है | 1 पतरस 2:9 में लिखा है – पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की)निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है , उसके गुण प्रगट करो|

याद रखे कि आप प्रभु यीशु मसीह में साधारण व्यक्ति नहीं है | हम परमेश्वर के गुणों को प्रकट करने वाले व्यक्ति हैं | यीशु मसीह ने वो कार्य करके हमारे सामने आदर्श पेश किया है | अब बारी हमारी है | अच्छा पेड़ अच्छा फल लता है, बुरा पेड़ बुरा फल लाता है | यीशु मसीह ने हमें फल लाने के लिए बुलाया है | वो ऐसा कहते हैं – तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे। (यहन्ना 15:16 )

हमें बुला कर, ठहराकर भेजता है | आप सोचेंगे पेड़ को कहीं जाते हुए नहीं देखा | यह एक तुलना है | आप जब बहार निकलते हैं लोग आपको देखते हैं | इसकारण यीशु मसीह ने ऐसा भी कहा … तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। (यूहन्ना 5:16) यीशु में जीवन जीना आनंद और दुःख दोनों है | आप यदि आनंदित होते है तो दुःख उठाने के लिए भी तैयार रहें | पौलूस ऐसी दशा में हमें याद दिलाता है – और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात् उन्हीं के लिये जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। (रोमियों 8:28 )

बस शर्त ये है की हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बुलाये गए हों| परमेश्वर ने आपको बुलाया है तो अंत तक आपके साथ रहेगा | बस उसके आज्ञाकारी बने रहें |

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