यीशु मसीह का अधिकार और सामर्थ

यीशु मसीह का अधिकार और सामर्थ

एक बार नाईन नामक शहर में एक विधवा का जवान जो मर चुका था। यीशु ने जब इस विधवा को रोते हुए देखा तो कहा मत रो। और उस पार्थिव शरीर से कहा “हे जवान, मैं तुझ से कहता हूँ, उठ!” लूका 7:14 HINDI-BSI यीशु मसीह ने एक बड़ा समूह जो यह मानती थी कि मुर्दे नहीं जी उठते उन्हें गलत साबित किया। ऐसा उसने कई बार किया। एक बार याईर कि बेटी को जिलाया। उसे ऐसा बोल कर उठाया जैसा सोते हुए को जगाते हैं। कहा कि वो सोती है, मुर्दा नहीं है। लाज़र को कब्र से बाहर ऐसा निकाला, जैसा किसी को घर के अंदर सो रहे इंसान को जोर से नाम लेकर बाहर बुला रहे हों। और स्वयं भी अपनी मृत्यु के बाद मुर्दों में से जी उठकर साबित किया कि मृत्यु पर उसका अधिकार है। 

एक बार यीशु नाव से अपने चेलों के साथ सफर कर रहे थे। बड़ी आंधी और तूफ़ान ने उन्हें घेर लिया। चेले यह देखकर डर गए जब देखा कि नाव डूबने वाली है। और इस आंधी तूफान के मध्य यीशु आराम से सो रहे थे। तब चेलों ने पास आकर उसे जगाया और कहा, “हे प्रभु, हमें बचा, हम नष्ट हुए जाते हैं।” उसने उनसे कहा, “हे अल्पविश्वासियो, क्यों डरते हो?” तब उसने उठकर आँधी और पानी को डाँटा, और सब शान्त हो गया। मत्ती 8:25‭-‬26 HINDI-BSI यीशु ने आंधी और पानी को डांटने से पहले अपने अल्प विश्वासी चेलों को डाँटा। प्रकृति पर अपना अधिकार दिखाकर यीशु ने चेलों को समझाया कि वो कौन है। इसलिए …वे अचम्भा करके कहने लगे, “यह कैसा मनुष्य है कि आँधी और पानी भी उसकी आज्ञा मानते हैं।” मत्ती 8:27 HINDI-BSI

हम ऐसे परमेश्वर की आराधना करते हैं जो स्वर्ग और पृथ्वी पर सामर्थ और अधिकार रखता है। यह बात यीशु ने पृथ्वी से स्वर्ग को प्रस्थान करते हुए चेलों को फिर याद कराया। यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। मत्ती 28:18 HINDI-BSI यह अधिकार आदि से यीशु मसीह के पास थी। यीशु से कई बार बुद्धिजीवी और धर्म गुरुओं द्वारा यह प्रश्न किया जाता था कि वो आश्चर्य के काम किस अधिकार से करता है? (मत्ती 21:23-27) हर बात पर उसका अधिकार है। परन्तु उसने सामर्थ और अधिकार का सही इस्तेमाल किया। सामर्थ और अधिकार के द्वारा अनगिनत धन और वस्तुओं का भंडारण कर सकता था। पर ऐसा क्यों नहीं किया? क्योंकि सब कुछ तो उसका ही है। फिर क्यों जमा करना? यीशु तो समस्त संसार को जीवन देने आए थे। क्योंकि संसार जीवन को खो चुका था।

एक इंसान ही है जो यीशु मसीह पर शक करता है। वरना प्रकृति, दुष्ट आत्मामायें, शैतान सब जानते और पहचानते हैं ।

क्या आप यीशु के अधिकार और सामर्थ पर प्रश्न करते हैं? या आपको यीशु मसीह पर शक है? आज आप से यीशु सवाल नहीं जवाब पूछ रहा है, क्या आप उसको अपने ह्रदय में जगह देंगे?

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