यीशु मसीह के पीछे चलना

यीशु मसीह के पीछे चलना

दुनिया में बहुत लोग आये पर यीशु मसीह ही क्यो? बडे से बडे महा-पुरुष, ज्ञानी, और बलवान लोग आये और चले गये। आखिर यीशु मसीह के पीछे ही क्यो चलना? दरसल यीशु मसीह परमेश्वर के पुत्र जो संसार में मानव का रूप में कुवांरी मरियम से जन्मा और स्वय परमेश्वर होकर मानवजाति के पाप को मिटाने के लिये कलवरी क्रुस पर अपना प्राण दिये । यीशु मसीह,परमेश्वर का प्रेम और मानव-जाति के उद्धार का योजना है।

“क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नष्‍ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

(यूहन्ना 3:16)

अब सवाल यह है कि हम यीशु मसीह के पीछे क्यू चले ? दरसल, यीशु ने स्वय कहा- अच्छा चरवाहा मैं हूँ; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। (यूहन्ना 10:11)
दुनिया में जितने भी बलवान आये अधिक्तर सबने किसी न किसी का जान लिया, हत्या किया। चाहे राज्य करने के लिये या फिर बचाव के लिये क्यो न हो । लेकिन यीशु सबसे अलग है। सर्व सामर्थी होकर भी प्रेम के कारण अपना प्राण देकर सबके दिलो में राज करता है।
आज पुरे विश्व में उसको मानने वालो की संख्या दिन ब दिन बढ रहा है। आखिर क्या वजह है कि दुःख पीढा के बावजूद लोग उसके अनुयायी हैं? आप को यह जानकर खुशी और हैरानी होगी कि येशु अपने चेलों का चुनाव खुद करते हैं। यीशु ने यह बात आपने चुने हूवे चेलो से बातचीत के दौरान कही- तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें नियुक्‍त किया कि तुम जाकर फल लाओ और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे। (यूहन्ना 15:16) आपको इस बात की खुशी होनी चाहिये कि उसने आपका चुनाव किया है। और अगर अब तक चुने नहीं गये हैं तो विनती करनी चाहिये कि आप चुने जाए।

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यीशु मसीह वो मेम्ना है जो सम्पुर्ण मावन-जाति के पाप के कारण घात किया गया । बाइबल बताती है – ..जो जगत की उत्पत्ति के समय से घात हुआ है ( प्रकाशितवाक्य 13:8) यीशु मसीह यह प्रेम, कि दुसरो को लिये अपना प्राण देना, समस्त संसार के प्रति महान प्यार का प्रमाण देता है ।


यीशु मसीह के बारे में पौलूस सुंदर गवाही देता हैवह तो अदृश्य परमेश्‍वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। 16क्योंकि उसी में सारी वस्तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हों अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएँ, क्या प्रधानताएँ, क्या अधिकार, सारी वस्तुएँ उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। 17वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं। 18वही देह, अर्थात् कलीसिया का सिर है; वही आदि है, और मरे हुओं में से जी उठनेवालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 19क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उसमें सारी परिपूर्णता वास करे, 20और उस के क्रूस पर बहे हुए लहू के द्वारा मेलमिलाप करके, सब वस्तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले, चाहे वे पृथ्वी पर की हों चाहे स्वर्ग में की। (कुलुस्सियों 1:15-20)

अब आप चुने गए हैं । पवित्र लोगो के समुह में। अब यीशु हमारा पहचान है । यीशु के साथ हैं तो। उसमें न तो यूनानी रहा न यहूदी, न खतना न खतनारहित, न जंगली, न स्कूती, न दास और न स्वतंत्र : केवल मसीह सब कुछ और सब में है। 12इसलिये परमेश्‍वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। (कुलुस्सियों 3:11-12)

एक ठोस बात यीशु मसीह ने अपने पीछे चलने वाले लोगो के लिये कही। उसने साफ कह दिया कि क्या कीमत चुकाना होगा। आज लोग इस भ्रम में हैं कि मसीह के पीछे लोग लालच के कारण आते हैं। मैं इस बात का इनकार नहीं करता कि कुछ लोग लालच में भी साथ चलते हैं। यीशु इस दुनिया में जब अपना प्रचार कार्य कर रहे थे तब भी यह समस्या थी। सबका अलग अलग मकसद था उसके पीछे चलने के लिये। कोई उसके पीछे नाम के लिये, कोई काम के लिये, कोई भोजन के लिये, कोई आश्चर्य के काम देखने के लिये, कोई गलती ढूढने के लिये।


क्रुस की मौत सहने से पहले सब उसे छोड कर चले गये थे। यह इस बात का सबूत है कि सबके पास अपना विचार धारा था। इसलिये पहले ही उन्होने ऐसा कहा था-
“यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति-दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। 24क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा। 25यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपना प्राण खो दे, या उसकी हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? 26जो कोई मुझसे और मेरी बातों से लजाएगा; मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की, और पवित्र स्वर्गदूतों की, महिमा सहित आएगा, तो उससे लजाएगा। (मती 9:23-26)

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